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विरुद्ध आहार (wrong food combination

भोजन हमारे शरीर को बल प्रदान करता है .हमारे शरीर का पोषण करता है लेकिन वह  सातम्य होना चाहिए.अगर हम किये गए भोजन कों गुण ,संयोग ,देश ,काल ,संस्कार ,मात्रा ,स्वभाव विरुद्ध करते है.तो वह हमारे शरीर मे रोग उत्पन्न करता है! यह कुछ विरुद्ध आहार है जो हमें एक साथ सेवन नही करना चाहिए ! * मछली और दूध का सेवन नही करना चाहिए.  * मूली को गुड़ एवं शहद के साथ नही खाना चाहिए.  * खीर को सत्तू तथा ककड़ी, खिचड़ी  के साथ सेवन नही करना  चाहिए.  * खीर, मावा एवं मलाई के साथ खिचड़ी एवं शराब का सेवन नही करना चाहिए.  * घी को कासे से बर्तन मे ज्यादा दिन रखने से वह विष जैसा हो जाता है!इसका सेवन नही करना चाहिए.  *दही को रात्रि मे सेवन नही करना चाहिए. तथा दही को गर्म कर नही खाना चाहिए.  *शहद एवं घी को बराबर मात्रा मे नही खाना चाहिए. बराबर मात्रा मे होने से यह विषाक्त हो जाते है.  *सरसो का साग भी विरुद्ध आहार  है  *उड़द दाल को मूली के साथ, गुड़, दूध, दही तथा घी के साथ नही खाना चाहिए.  *गर्म एवं ठन्डे,  कच्चे एवं पका एक साथ मिलाकर नही खाना च...

हेमंत ऋतूचर्या

आयुर्वेद मे आचार्यो ने ऋतू अनुसार उसकी परिचर्या बताई है. माह नवंबर से दिसम्बर, जनवरी मध्य तक हेमंत ऋतू होती अभी हेमंत ऋतू का समय है हमें ऋतूचर्या का पालन कर आहार विहार करना चाहिए. ये करने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है. यह विसर्ग काल का समय होता है इसमें मनुष्य का बल  बढ़ता है हेमंत ऋतू के लक्षण हेमंत ऋतू मे उत्तर दिशा से शीत वायु चलती है. चारो तरफ धुआँ सा प्रतीत होता है. सारे जलाशय बर्फ से ढक जाते है. इस ऋतू मे लोध्र, प्रियंगु, लवली नागकेशर के पुष्प खिलते है. हेमंत ऋतू आहार इस ऋतू मे स्निग्ध, मधुर अम्ल, लवण रसो का सेवन करना चाहिए. गुड़ एवं पीठि से बनाई चीजे, गन्ने का रस पीना चाहिए. दूध से बनाई चीजे जैसे ताजा दही, छाछ,माखन,  घी, पनीर  खाना चाहिए. उड़द दाल खाना चाहिए क्योंकि बल अधिक एवं इस ऋतू मे अग्नि को बल प्रदान करती है. जो गरिष्ठ उडद दाल को भी पचा देती है वसा, तेल एवं नये चावल खाना चाहिए. कुनकुने पानी का सेवन करना चाहिए. खजूर, बादाम, मेथी दाना, खाना चाहिए ये शरीर को गर्मी प्रदान करते है. हेमंत ऋतू विहार  इस ऋतू मे व्यायाम करना श्रेष्ठ है क्योंकि बल ज्या...

माँ का दूध

माँ का दुग्ध शिशु के लिए अमृत होता है यह शिशु की बुद्धि, विकास के लिए, रोगप्रतिरोधक समता है. माँ का दुग्ध पीने से रोग एवं  संक्रमण से बचा जाता है यह माँ और शिशु के रिश्ते को मजबूत बनाता है. बच्चे को शक्ति प्रदान करता है. अगस्त के पहले सप्ताह को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप के मनाया जाता है. जो कामकाजी महिलाओ को  स्तनपान के लिए प्रेरित भी करे.  दुग्ध पिलाने के तरीके  🌸गोद मे लेकर ही पिलाया जाये. बच्चे जब भूखा हो उसे तब दुग्ध पिलाये.  निचे लेटकर बच्चे को दुग्ध न पिलाये क्योंकि दुग्ध बच्चे की श्वास नली मे जाने का खतरा रहता है  दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार अवश्य दिलानी चाहिए. बिना डकार दिए सुलाने पर बच्चा पिया गया दूध निकाल देता है.  दुग्ध परीक्षा  🌸 यह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि आज आधुनिक युग मे दुग्ध के फायदे तो सबको पता लेकिन जब तक हमें यह नही पता होगा की दूध दूषित है या नही शिशु का पूर्ण विकास नही होगा. क्योंकि आने वाला दुग्ध पर्याप्त मात्रा मे आ रहा है शिशु दूध भी पी रहा है लेकिन आयु अनुसार शिशु की वृद्धि नही होती है जिसका एक बड़ा ...

भोजन करने के तरीके

आज इस आधुनिक जीवन मे जो हमारी कार्यशैली है,  उसके कारण समय पर भोजन ,एक सम्पूर्ण भोजन नहीं करते है जो हमें रोगो  की और ले जाता है हमें खाना कब , कितना और कैसे खाना चाहिए.भोजन हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग है. भोजन कैसे करे 1.जब भूख लगी हो तभी भोजन करें क्योंकि उस समय हमारी अग्नि प्रबल होती है. 2.हाथ ,पैर धो कर भोजन करना चाहिए. 3.भोजन हमेशा जमीन पर बैठकर करना चाहिए. 4.आपका भोजन सबसे पहले संतुलित होना चाहिए. 5.भोजन हमेशा गर्म ही खाये. 6.आयुर्वेदानुसार  पहले हमें मीठा मध्य मे कटु एवं अंत मे कषाय रस वाला भोजन करना चाहिए. 7.भोजन से  एक घंटे पहले ,भोजन करते समयथोड़ा थोड़ा  पानी पिये. 8..भोजन हमें एकाग्रता से करना चाहिए .बिना बात किये कभी भी गुस्सा होने पर भोजन नहीं करना चाहिए . 9.भोजन को अच्छी तरह चबा कर खाना चाहिए 10.आपकी जितनी भूख है उससे थोड़ा सा कम भोजन करे . 11.भोजन ना ज्यादा न कम करना चाहिए. 12.हमेशा ताजा भोजन ही करें बासी न खाये. भोजन करने का समय 1.भोजन जठराग्नि के प्रबल होने पर करना चाहिए .आयुर्वेद आचार्य के अनुसार सूर्योदय ...

स्वर्णप्राशन

स्वर्णप्राशन  इसे स्वर्ण भस्म एवं आयुर्वेदिक ओषधि,  गो घृत से बनाया जाता है.यह आयुर्वेद मे बच्चों को देने वाली एक प्राचीन ओषधि है जिसका उल्लेख प्राचीन संहिता मे किया गया है   इसे पुष्य नक्षत्र के दिन दिया जाता है.                 यह 0माह से 16वर्ष तक के बच्चों को दिया जाता है  बच्चों के बौद्धिक विकास ,सामान्य विकारो से लड़ने मे शक्ति प्रदान करता है        यह विशेष रूप से आटिज्म ,सिखने मे कठिनाई ध्यान घाटे ,विलम्बित माइलस्टोन आदि से ग्रसित बच्चों के लिए एक अचूक ओषधि है. स्वर्णप्राशन से रोगों के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है .स्मृति तेज ,सिखने की शक्ति बढ़ती है देखने  और सुनने की शक्ति भी बढती है  पाचन शक्ति मे सुधार होता है . बच्चों को जो मौसमी बीमारियों से बचाता है एवं कई प्रकार की एलर्जी से भी बचाता है       महर्षि कश्यप कहते है स्वर्ण प्राशन से बुद्धि ,पाचन अग्नि और शारीरिक शक्ति मे सुधार ...

गुड़

भारतीय खाने मे गुड़ का सदियों पहले से उपयोग होता रहा है  गुड़ का निर्माण गन्ने के रस से होता हैऔर भारत के सभी प्रांतो मे बनाया जाता है.  आज हम आपको गुड़ से होने वाले लाभ के बारे मे बताएंगे.  1.यह एक प्रकार कि नेचुरल मिठाई भी है. यह  खाने मे स्वादिष्ट भी होता है सर्दियों के मौसम मे हम इसका ज्यादा उपयोग करते है. लेकिन इसका उपयोग हम हमेशा कर सकते है लेकिन उचित मात्रा के साथ क्योंकि गुड़ कि ताशीर गर्म होती है.  2 गुड़ मे पानी, सुक्रोस, चीनी, कैल्सियम, फास्फोरस, vi-Bएवं कर्बोह्य्द्रेट होता है.  3.गुड़ से पाचन क्रिया अच्छे से होती है एवं यह ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत है. जिससे थकान कमजोरी नहीं होती है.  4 उच्च रक्त चाप (high blood pressure ) को भी गुड़ कंट्रोल करता है.  5.गुड़ आयरन का एक बहुत बड़ा स्त्रोत है रक्ताल्पता, (anemia )मे रोज गुड़ खाने से यह खून कि कमी को दूर करता है. खून की कमी वालो के लिए यह अमृत के समान है.  6.कैल्सियम और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होने के कारण यह हड्डियों को भी मजबूत रखता है.  7.गुड़ खाने से त्वचा मे भी निखार आता है ग...

करोना योद्धा कौन

योद्धा कौन  आज कोरोना महामारी  देश के सभी लोग कंघे से कंधा मिलाकर लड़ रहे है. जँहा चिकित्सा क्षेत्र, पुलिस विभाग, एवं नगर पालिका विभाग का मुख्य योगदान है जो कोरोना से ग्रसित लोगो के सीधे सम्पर्क मे आते है. जो कर्मचारी, मैदानी कार्यकर्त्ता है उनका कोरोना से ग्रसित व्यक्ति एवं उनके परिवार के सम्पर्क मे आते है और जँहा कोविड सेंटर बनाये गए है वंहा भी कोरोना से ग्रसित लोगो का इलाज से लेकर उनके रहने मे योगदान है. जो सबसे बड़े कोरोना योद्धा है जो उनके साथ रहकर काम कर रहे है.  हमें उन सब लोगो का सम्मान करना चाहिए.  लेकिन आज इस आधुनिक युग मे जो संस्थाएं, जो कोरोना योद्धा का सम्मान करने कि एक होड़ सी लगी है जिसमे  वो लोग अपनी संस्था का नाम बढ़ाने के लिए कोरोना योद्धा सम्मान करते हैजिसमे उन लोगो का सम्मान होता है जिनका कोई योगदान है ही नहीं, और जो जमीनी स्तर से कार्य कर रहे कोरोना योद्धा उस सम्म्मान से वांछित रह जाते है, हमें उन लोगो का ख्याल रखना चाहिए  बहुत कम मानदेय पर काम भी कर रहे है एवं इस महामारी मे सबके साथ है,  लेकिन आज ऐसी कोई सस्था नहीं है जो उन जमीनी स्तर...