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स्वर्ण भस्म

  स्वर्ण का वर्णन प्रचीन काल मे आभूषण के रूप मे प्रयोग  होता रहा है. एवं प्राचीन ग्रन्थ, आयुर्वेद मे सोने के बने पात्र, उपकरण, और  ओषधि, एवं विषनाशक गुण मिलते है. चिकित्सा के लिए भी सोने के उपयोग किया जाता है. यह पिले रंग की चमकीली धातु होती है यह मृदु, भारी एवं कीमती धातु है. इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है शुद्ध स्वर्ण मे 98.8%ही स्वर्ण होता है. यह अत्यंत मृदु धातु होती है इसलिये इसमें शेष धातु जैसे चांदी, तांबा मिलाई जाती है जिससे यह कठोर हो जाती है और इसका आभूषण मे उपयोग होता है. स्वर्ण खनिज से प्राप्त होता है   आयुर्वेद मे स्वर्ण का प्रयोग स्वर्ण भस्म के रूप मे किया जाता है. पहले स्वर्ण को अनेक विधियों द्वारा शुद्ध किया जाता है ततपश्चात उसका प्रयोग ओषधि के रूप मे किया जाता है. स्वर्ण भस्म के गुण यह रस मे  कषाय, तिक्त, मधुर व कटु होता है. यह गुण मे गुरु, स्निग्ध, और पिच्छिल होता है. इसका वीर्य शीत एवं विपाक मधुर होता है. स्वर्ण भस्म के उपयोग 1.यह पित्त शामक है 2.यह  स्मृति को बढ़ाता है, शरीर को शक्ति प्रदान करता है, आ...