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Showing posts from November, 2020

स्वर्ण भस्म

  स्वर्ण का वर्णन प्रचीन काल मे आभूषण के रूप मे प्रयोग  होता रहा है. एवं प्राचीन ग्रन्थ, आयुर्वेद मे सोने के बने पात्र, उपकरण, और  ओषधि, एवं विषनाशक गुण मिलते है. चिकित्सा के लिए भी सोने के उपयोग किया जाता है. यह पिले रंग की चमकीली धातु होती है यह मृदु, भारी एवं कीमती धातु है. इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है शुद्ध स्वर्ण मे 98.8%ही स्वर्ण होता है. यह अत्यंत मृदु धातु होती है इसलिये इसमें शेष धातु जैसे चांदी, तांबा मिलाई जाती है जिससे यह कठोर हो जाती है और इसका आभूषण मे उपयोग होता है. स्वर्ण खनिज से प्राप्त होता है   आयुर्वेद मे स्वर्ण का प्रयोग स्वर्ण भस्म के रूप मे किया जाता है. पहले स्वर्ण को अनेक विधियों द्वारा शुद्ध किया जाता है ततपश्चात उसका प्रयोग ओषधि के रूप मे किया जाता है. स्वर्ण भस्म के गुण यह रस मे  कषाय, तिक्त, मधुर व कटु होता है. यह गुण मे गुरु, स्निग्ध, और पिच्छिल होता है. इसका वीर्य शीत एवं विपाक मधुर होता है. स्वर्ण भस्म के उपयोग 1.यह पित्त शामक है 2.यह  स्मृति को बढ़ाता है, शरीर को शक्ति प्रदान करता है, आ...

आयुर्वेद औषध

त्रिफला -  1.हरीतकी 2.विभीतक 3.आवला   त्रिकटु   - 1पिप्पली  2. मरीच (काली मिर्च )3. सौंठ त्रिमद  -  नागरमोथा 2. चित्रकमूल 3.विडंग मधुरत्रय -  1.घृत    2.गुड़    3.शहद त्रिजातक     1.दालचीनी 2.छोटी इलायची 3.तेजपत्र चतुर्जात       1.दालचीनी    2.छोटी इलायची  3.तेजपत्र       4 .नागकेशर      चतुरुष्ण  -   1.पिप्पली    2. मरीच (कालीमिर्च )           3.शुंठी    4.पिपलीमुल चतुर्बीज  1.मेथी           2.चंद्रशुर   3.मंगरैल        4  . अजवाइन                              पंचमूल -- वहृत पंचमूल     1. बेलमुलत्वक  2....

अर्श (piles)

अर्श को सामान्य भाषा मे बवासीर या मस्सा कहा जाता है. आयुर्वेद मे इसका प्रमुख कारण जठराग्नि (पाचन शक्ति ) का कमजोर होना बताया गया है. अर्श होने के कारण ज्यादा भारी भोजन करना, ठंडा या बासी खाना, दिन मे अधिक सोना, अधिक मसालेदार खाना या भूख न लगने पर भी खाना, मल मूत्र को रोकनाया मल त्याग करने मे अधिक जोर लगाना. ज्यादा यात्रा करना आदि कारणों से जठराग्नि मंद दुर्बल होकर अर्श की उत्पत्ति करती है. प्रारम्भिक लक्षण भोजन ठीक से न पचना, दुर्बलता, पेट फूलना, अधिक डकारे आना, पैर की पिंडलियों मे दर्द होना, मल त्याग मे कष्ट होना, आलस्य, गुदा मे काटने जैसी पीड़ा होना होना, मलत्याग मे कष्ट होना. प्रकार 1.शुष्क 2. स्त्रावी (खुनी ) लक्षण मल त्याग मे कष्ट, गूदा मार्ग मे सूजनया मस्से जैसे बाहर आना, मल मार्ग से खून निकलना. चिकित्सा 1.औषध चिकित्सा 2.क्षार कर्म 3.अग्नि कर्म 4.शस्त्र कर्म अचिरकलजातानि, अल्पदोषलिङ्गे पद्रवनि भेषजसाधयानि. जो अधिक पुराने या कम लक्षण वाले हो औषध, से ठीक हो ठीक हो जाते है. रोग के पुराने हो जाने पर, अधिक बढ़ जाने पर, अधिक लक्षणों से...

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भगवान धन्वंतरि के जन्मदिवस के दिन  दिवाली के दो दिन पहले धनतेरस के दिन मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि जी ही आये थे.  उनके एक हाथ मे ताम्बे का कलश, एक मे शंख एक मे चक्रएवं एक मे ओषधि है. भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता कहते है.  जब भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ तभी आयुर्वेद का भी धरती पर आया उससे पहले पुराणो अनुसार आयुर्वेद स्वर्ग मे ही था.  आयुर्वेद को धरती पर लाने का अर्थ यह था उसके गुण और  आयुर्वेद को आम लोगो के लिए उपयोग मे लाये, रोगों को दूर करने के लिए इसका उपयोग हो.  आज हम देखते है की आयुर्वेद का पूरी दुनिया ने अपना लिया है. एवं इसका महत्व  समझ लिया है.  इसी को देखते हुए भारत आयुष ने 28अक्टूबर 2016को धन्वंतरि जयंती के दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाने की घोषणा की.  इसका एक लोगो भी बनाया जिसमे पांच पत्तियाँ पंच महाभूत  आकाश, अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी का प्रतिक है एवं तीन बिंदु वात, कफ, पित्त का प्रतिक है. एवं बीच मे भगवान धन्वंतरि है.  आज ...

विरुद्ध आहार (wrong food combination

भोजन हमारे शरीर को बल प्रदान करता है .हमारे शरीर का पोषण करता है लेकिन वह  सातम्य होना चाहिए.अगर हम किये गए भोजन कों गुण ,संयोग ,देश ,काल ,संस्कार ,मात्रा ,स्वभाव विरुद्ध करते है.तो वह हमारे शरीर मे रोग उत्पन्न करता है! यह कुछ विरुद्ध आहार है जो हमें एक साथ सेवन नही करना चाहिए ! * मछली और दूध का सेवन नही करना चाहिए.  * मूली को गुड़ एवं शहद के साथ नही खाना चाहिए.  * खीर को सत्तू तथा ककड़ी, खिचड़ी  के साथ सेवन नही करना  चाहिए.  * खीर, मावा एवं मलाई के साथ खिचड़ी एवं शराब का सेवन नही करना चाहिए.  * घी को कासे से बर्तन मे ज्यादा दिन रखने से वह विष जैसा हो जाता है!इसका सेवन नही करना चाहिए.  *दही को रात्रि मे सेवन नही करना चाहिए. तथा दही को गर्म कर नही खाना चाहिए.  *शहद एवं घी को बराबर मात्रा मे नही खाना चाहिए. बराबर मात्रा मे होने से यह विषाक्त हो जाते है.  *सरसो का साग भी विरुद्ध आहार  है  *उड़द दाल को मूली के साथ, गुड़, दूध, दही तथा घी के साथ नही खाना चाहिए.  *गर्म एवं ठन्डे,  कच्चे एवं पका एक साथ मिलाकर नही खाना च...

हेमंत ऋतूचर्या

आयुर्वेद मे आचार्यो ने ऋतू अनुसार उसकी परिचर्या बताई है. माह नवंबर से दिसम्बर, जनवरी मध्य तक हेमंत ऋतू होती अभी हेमंत ऋतू का समय है हमें ऋतूचर्या का पालन कर आहार विहार करना चाहिए. ये करने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है. यह विसर्ग काल का समय होता है इसमें मनुष्य का बल  बढ़ता है हेमंत ऋतू के लक्षण हेमंत ऋतू मे उत्तर दिशा से शीत वायु चलती है. चारो तरफ धुआँ सा प्रतीत होता है. सारे जलाशय बर्फ से ढक जाते है. इस ऋतू मे लोध्र, प्रियंगु, लवली नागकेशर के पुष्प खिलते है. हेमंत ऋतू आहार इस ऋतू मे स्निग्ध, मधुर अम्ल, लवण रसो का सेवन करना चाहिए. गुड़ एवं पीठि से बनाई चीजे, गन्ने का रस पीना चाहिए. दूध से बनाई चीजे जैसे ताजा दही, छाछ,माखन,  घी, पनीर  खाना चाहिए. उड़द दाल खाना चाहिए क्योंकि बल अधिक एवं इस ऋतू मे अग्नि को बल प्रदान करती है. जो गरिष्ठ उडद दाल को भी पचा देती है वसा, तेल एवं नये चावल खाना चाहिए. कुनकुने पानी का सेवन करना चाहिए. खजूर, बादाम, मेथी दाना, खाना चाहिए ये शरीर को गर्मी प्रदान करते है. हेमंत ऋतू विहार  इस ऋतू मे व्यायाम करना श्रेष्ठ है क्योंकि बल ज्या...

माँ का दूध

माँ का दुग्ध शिशु के लिए अमृत होता है यह शिशु की बुद्धि, विकास के लिए, रोगप्रतिरोधक समता है. माँ का दुग्ध पीने से रोग एवं  संक्रमण से बचा जाता है यह माँ और शिशु के रिश्ते को मजबूत बनाता है. बच्चे को शक्ति प्रदान करता है. अगस्त के पहले सप्ताह को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप के मनाया जाता है. जो कामकाजी महिलाओ को  स्तनपान के लिए प्रेरित भी करे.  दुग्ध पिलाने के तरीके  🌸गोद मे लेकर ही पिलाया जाये. बच्चे जब भूखा हो उसे तब दुग्ध पिलाये.  निचे लेटकर बच्चे को दुग्ध न पिलाये क्योंकि दुग्ध बच्चे की श्वास नली मे जाने का खतरा रहता है  दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार अवश्य दिलानी चाहिए. बिना डकार दिए सुलाने पर बच्चा पिया गया दूध निकाल देता है.  दुग्ध परीक्षा  🌸 यह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि आज आधुनिक युग मे दुग्ध के फायदे तो सबको पता लेकिन जब तक हमें यह नही पता होगा की दूध दूषित है या नही शिशु का पूर्ण विकास नही होगा. क्योंकि आने वाला दुग्ध पर्याप्त मात्रा मे आ रहा है शिशु दूध भी पी रहा है लेकिन आयु अनुसार शिशु की वृद्धि नही होती है जिसका एक बड़ा ...