माँ का दुग्ध शिशु के लिए अमृत होता है यह शिशु की बुद्धि, विकास के लिए, रोगप्रतिरोधक समता है. माँ का दुग्ध पीने से रोग एवं संक्रमण से बचा जाता है यह माँ और शिशु के रिश्ते को मजबूत बनाता है. बच्चे को शक्ति प्रदान करता है. अगस्त के पहले सप्ताह को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप के मनाया जाता है. जो कामकाजी महिलाओ को स्तनपान के लिए प्रेरित भी करे.
दुग्ध पिलाने के तरीके
🌸गोद मे लेकर ही पिलाया जाये.
बच्चे जब भूखा हो उसे तब दुग्ध पिलाये.
निचे लेटकर बच्चे को दुग्ध न पिलाये क्योंकि दुग्ध बच्चे की श्वास नली मे जाने का खतरा रहता है
दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार अवश्य दिलानी चाहिए. बिना डकार दिए सुलाने पर बच्चा पिया गया दूध निकाल देता है.
दुग्ध परीक्षा
🌸 यह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि आज आधुनिक युग मे दुग्ध के फायदे तो सबको पता लेकिन जब तक हमें यह नही पता होगा की दूध दूषित है या नही शिशु का पूर्ण विकास नही होगा. क्योंकि आने वाला दुग्ध पर्याप्त मात्रा मे आ रहा है शिशु दूध भी पी रहा है लेकिन आयु अनुसार शिशु की वृद्धि नही होती है जिसका एक बड़ा कारण है दुग्ध मे दोष होना.
आयुर्वेदानुसार बड़े अच्छे से आचार्य ने दुग्ध के दोष बताये है.
दुग्ध सफेद होना चाहिए जो की पानी मे डालने पर पानी मे घुल जायेगा.
यदि पानी मे दुग्ध तैरता तो वह वात कारक है
यदि पानी मे दूध मे पिली नीली रेखाएं होती है तथा गंध आती है. मतलब वाह पित्त कारक है
यदि पानी मे डालने पर दुग्ध निचे तल मे बैठ जाता है मतलब दुग्ध कफ कारक है
यदि इन दोषों से युक्त शिशु दुग्ध का सेवन करता है तो उसकी वृद्धि विकास ठीक से नही होता है.
तथा शिशु रोग युक्त होता है.
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