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स्वर्णप्राशन

स्वर्णप्राशन  इसे स्वर्ण भस्म एवं आयुर्वेदिक ओषधि,  गो घृत से बनाया जाता है.यह आयुर्वेद मे बच्चों को देने वाली एक प्राचीन ओषधि है जिसका उल्लेख प्राचीन संहिता मे किया गया है   इसे पुष्य नक्षत्र के दिन दिया जाता है.                
यह 0माह से 16वर्ष तक के बच्चों को दिया जाता है  बच्चों के बौद्धिक विकास ,सामान्य विकारो से लड़ने मे शक्ति प्रदान करता है       
यह विशेष रूप से आटिज्म ,सिखने मे कठिनाई ध्यान घाटे ,विलम्बित माइलस्टोन आदि से ग्रसित बच्चों के लिए एक अचूक ओषधि है.
स्वर्णप्राशन से रोगों के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है .स्मृति तेज ,सिखने की शक्ति बढ़ती है
देखने  और सुनने की शक्ति भी बढती है 
पाचन शक्ति मे सुधार होता है .
बच्चों को जो मौसमी बीमारियों से बचाता है एवं कई प्रकार की एलर्जी से भी बचाता है      

महर्षि कश्यप कहते है स्वर्ण प्राशन से बुद्धि ,पाचन अग्नि और शारीरिक शक्ति मे सुधार होता है .यह त्वचा मे टोन उप करता है यह बच्चों को होने वाले संक्रमण से बचाता है एवं लड़ने मे मदद करता है .
आचार्य वाग्भट्ट ने कहा है जो बालक निरंतर सवर्णप्राशन का सेवन करता है उस पर विष का प्रभाव नहीं होता है. 

आधुनिक युग मे जिस तरह टीकाकरण किया जाता है प्राचीन काल मे स्वर्णप्राशन संस्कार भी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता था 

सुवर्णप्राशन हि एतत मेधाग्निबलवर्धनम् ।, आयुष्यं मंगलमं पुण्यं वृष्यं ग्रहापहम् ॥मासात् परममेधावी क्याधिभिर्न च धृष्यते ।षडभिर्मासै: श्रुतधर: सुवर्णप्राशनाद् भवेत् ॥

सूत्रस्थानम्, कश्यपसंहिता

अर्थात्,

स्वर्णप्राशन मेधा (बुद्धि), अग्नि ( पाचन अग्नि) और बल बढानेवाला है। यह आयुष्यप्रद, कल्याणकारक, पुण्यकारक, वृष्य (पदार्थ जिससे वीर्य और बल बढ़ता है), वर्ण्य (शरीर के वर्ण को तेजस्वी बनाने वाला) और ग्रहपीडा को दूर करनेवाला है. स्वर्णप्राशन के नित्य सेवन से बालक एक मास में मेधायुक्त बनता है और बालक की भिन्न भिन्न रोगो से रक्षा होती है। वह छह मास में श्रुतधर (सुना हुआ सब याद रखनेवाला) बनता है, अर्थात उसकी स्मरणशक्त्ति अतिशय बढती है।


Swarnaprashan It is made from Swarna Bhasma and Ayurvedic medicine and ghee.it is an ancient medicine for children in Ayurveda, which is mentioned in the ancient code. It is given to children from 0 months to 18 years.  Provides strength in fighting common disorders. It is a perfect remedy especially for children suffering from autism, difficulty in learning, attention deficit, delayed milestones, etc.. Gold stimulation strengthens the immune system against diseases. Memories are strong, learning power  Increases digestive power. Improves children, which protects them from seasonal diseases and also from many types of allergies.


Maharishi Kashyap says that golden wisdom improves the intelligence, digestive fire and physical strength.  It protects children from infection and helps in fighting.

Acharya Vagbhatt has said that the child who consumes Savarnaprashan continuously does not have the effect of poison.

In the modern era, the way in which vaccination is done, in ancient times, golden treatment rituals were also done to increase immunity.


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