राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भगवान धन्वंतरि के जन्मदिवस के दिन दिवाली के दो दिन पहले धनतेरस के दिन मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि जी ही आये थे.
उनके एक हाथ मे ताम्बे का कलश, एक मे शंख एक मे चक्रएवं एक मे ओषधि है. भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता कहते है.
जब भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ तभी आयुर्वेद का भी धरती पर आया उससे पहले पुराणो अनुसार आयुर्वेद स्वर्ग मे ही था.
आयुर्वेद को धरती पर लाने का अर्थ यह था उसके गुण और आयुर्वेद को आम लोगो के लिए उपयोग मे लाये, रोगों को दूर करने के लिए इसका उपयोग हो.
आज हम देखते है की आयुर्वेद का पूरी दुनिया ने अपना लिया है. एवं इसका महत्व समझ लिया है.
इसी को देखते हुए भारत आयुष ने 28अक्टूबर 2016को धन्वंतरि जयंती के दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाने की घोषणा की.
इसका एक लोगो भी बनाया जिसमे पांच पत्तियाँ पंच महाभूत आकाश, अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी का प्रतिक है एवं तीन बिंदु वात, कफ, पित्त का प्रतिक है. एवं बीच मे भगवान धन्वंतरि है.
आज कोरोना काल मे भी आयुर्वेद को सब मे माना है एवं कोरोना के इलाज मे भी यह कारागार है.
Nice
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