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पाण्डुरोग (anemia )

जिस रोग मे रोगी का वर्ण श्वेत - पीत का हो जाता है उसे पाण्डु रोग कहते है.जिसमे रक्त की कमी के कारण वर्ण श्वेत रंग का हो जाता है लक्षण 1.त्वचा का रंग पाण्डु होना 2. खून की कमी 3. मेद की कमी 4. कांति की कमी 5. कानो मे घंटी सुनाई देना 6. दुर्बलता 7. अग्नि कमजोर होना 8. अरुचि 9. थकावत 10. आँखों के आसपास सूजन 11. बालो का गिरना 12. श्वाश लेने मे कठिनाई 13. ज्यादा नींद आना
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सामान्य विकास (devlopment milestones)

शिशु का जन्म एवं उसके बाद उसके विकास की वृद्धि  एक  सामान्य होती है लेकिन किसी कारणवश यह वृद्धि नहीं हो पाती है. महीनों के अनुसार 0-3साल के बच्चे की सामान्य वृद्धि.                                                                     2 माह  🌸बच्चे का पेट के बल पर सर                              को  ऊपर उठाना   🌸 हाथो की मुठ्ठी खोलना       बड़ी वस्तु को देखना 🌸आंखे  मिलना 🌸मुस्कुराना 3 माह 🌸माँ को पहचान ना                                 🌸 गर्दन को संभालना      4 माह    🌸 सर को ऊपर रखना              ...

स्वर्णप्राशन 2021 समय

  1.      01 जनवरी     शुक्रवार   8:24 रात तक   2.     28 जनवरी     गुरुवार 3.     24 फरवरी      बुधवार    दोपहर 11:24 बजे से           25 फरवरी.     गुरुवार   दोपहर 12:10बजे तक   4.       23.  मार्च        मंगलवार    शाम 6:52 से             24   मार्च         बुधवार       शाम 7:36तक   5.         19 अप्रैल         सोमवार     रात 2:17 से                20 अप्रैल        मंगलवार     रात 3:18 तक    6.        17 मई         सोमवार.  सुबह  9:...

स्वर्ण भस्म

  स्वर्ण का वर्णन प्रचीन काल मे आभूषण के रूप मे प्रयोग  होता रहा है. एवं प्राचीन ग्रन्थ, आयुर्वेद मे सोने के बने पात्र, उपकरण, और  ओषधि, एवं विषनाशक गुण मिलते है. चिकित्सा के लिए भी सोने के उपयोग किया जाता है. यह पिले रंग की चमकीली धातु होती है यह मृदु, भारी एवं कीमती धातु है. इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है शुद्ध स्वर्ण मे 98.8%ही स्वर्ण होता है. यह अत्यंत मृदु धातु होती है इसलिये इसमें शेष धातु जैसे चांदी, तांबा मिलाई जाती है जिससे यह कठोर हो जाती है और इसका आभूषण मे उपयोग होता है. स्वर्ण खनिज से प्राप्त होता है   आयुर्वेद मे स्वर्ण का प्रयोग स्वर्ण भस्म के रूप मे किया जाता है. पहले स्वर्ण को अनेक विधियों द्वारा शुद्ध किया जाता है ततपश्चात उसका प्रयोग ओषधि के रूप मे किया जाता है. स्वर्ण भस्म के गुण यह रस मे  कषाय, तिक्त, मधुर व कटु होता है. यह गुण मे गुरु, स्निग्ध, और पिच्छिल होता है. इसका वीर्य शीत एवं विपाक मधुर होता है. स्वर्ण भस्म के उपयोग 1.यह पित्त शामक है 2.यह  स्मृति को बढ़ाता है, शरीर को शक्ति प्रदान करता है, आ...

आयुर्वेद औषध

त्रिफला -  1.हरीतकी 2.विभीतक 3.आवला   त्रिकटु   - 1पिप्पली  2. मरीच (काली मिर्च )3. सौंठ त्रिमद  -  नागरमोथा 2. चित्रकमूल 3.विडंग मधुरत्रय -  1.घृत    2.गुड़    3.शहद त्रिजातक     1.दालचीनी 2.छोटी इलायची 3.तेजपत्र चतुर्जात       1.दालचीनी    2.छोटी इलायची  3.तेजपत्र       4 .नागकेशर      चतुरुष्ण  -   1.पिप्पली    2. मरीच (कालीमिर्च )           3.शुंठी    4.पिपलीमुल चतुर्बीज  1.मेथी           2.चंद्रशुर   3.मंगरैल        4  . अजवाइन                              पंचमूल -- वहृत पंचमूल     1. बेलमुलत्वक  2....

अर्श (piles)

अर्श को सामान्य भाषा मे बवासीर या मस्सा कहा जाता है. आयुर्वेद मे इसका प्रमुख कारण जठराग्नि (पाचन शक्ति ) का कमजोर होना बताया गया है. अर्श होने के कारण ज्यादा भारी भोजन करना, ठंडा या बासी खाना, दिन मे अधिक सोना, अधिक मसालेदार खाना या भूख न लगने पर भी खाना, मल मूत्र को रोकनाया मल त्याग करने मे अधिक जोर लगाना. ज्यादा यात्रा करना आदि कारणों से जठराग्नि मंद दुर्बल होकर अर्श की उत्पत्ति करती है. प्रारम्भिक लक्षण भोजन ठीक से न पचना, दुर्बलता, पेट फूलना, अधिक डकारे आना, पैर की पिंडलियों मे दर्द होना, मल त्याग मे कष्ट होना, आलस्य, गुदा मे काटने जैसी पीड़ा होना होना, मलत्याग मे कष्ट होना. प्रकार 1.शुष्क 2. स्त्रावी (खुनी ) लक्षण मल त्याग मे कष्ट, गूदा मार्ग मे सूजनया मस्से जैसे बाहर आना, मल मार्ग से खून निकलना. चिकित्सा 1.औषध चिकित्सा 2.क्षार कर्म 3.अग्नि कर्म 4.शस्त्र कर्म अचिरकलजातानि, अल्पदोषलिङ्गे पद्रवनि भेषजसाधयानि. जो अधिक पुराने या कम लक्षण वाले हो औषध, से ठीक हो ठीक हो जाते है. रोग के पुराने हो जाने पर, अधिक बढ़ जाने पर, अधिक लक्षणों से...

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भगवान धन्वंतरि के जन्मदिवस के दिन  दिवाली के दो दिन पहले धनतेरस के दिन मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि जी ही आये थे.  उनके एक हाथ मे ताम्बे का कलश, एक मे शंख एक मे चक्रएवं एक मे ओषधि है. भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता कहते है.  जब भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ तभी आयुर्वेद का भी धरती पर आया उससे पहले पुराणो अनुसार आयुर्वेद स्वर्ग मे ही था.  आयुर्वेद को धरती पर लाने का अर्थ यह था उसके गुण और  आयुर्वेद को आम लोगो के लिए उपयोग मे लाये, रोगों को दूर करने के लिए इसका उपयोग हो.  आज हम देखते है की आयुर्वेद का पूरी दुनिया ने अपना लिया है. एवं इसका महत्व  समझ लिया है.  इसी को देखते हुए भारत आयुष ने 28अक्टूबर 2016को धन्वंतरि जयंती के दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाने की घोषणा की.  इसका एक लोगो भी बनाया जिसमे पांच पत्तियाँ पंच महाभूत  आकाश, अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी का प्रतिक है एवं तीन बिंदु वात, कफ, पित्त का प्रतिक है. एवं बीच मे भगवान धन्वंतरि है.  आज ...